Search More

poems > Deepawali

रौशनी का त्यौहार दीवाली इन्ही

रौशनी का त्यौहार दीवाली इन्ही पंक्तियों के साथ  बहुत बहुत मुबारक हो ...

जगमग आतिश बाजियां , रौशन है आकाश ! ....
और सितारे ढो रहे , अंधियारे की लाश !! .....

दिए जला दिल से मगर , दिल न जला तूं यार ! ...
ख़ुशी ख़ुशी दिल से मना , दीपों का त्यौहार !! ...

ज्यूँ ही हवा चराग़ के , आयी ज़रा समीप ! ....
फ़ैल गयी फिर रौशनी , जले दीप से दीप !!....

बिखरे पत्ते ताश के , भरे हुए हैं जाम ! ....
दीवाली की आड़ में , कैसे कैसे काम !! ...

घर आवे जो लक्ष्मी ,  सेठ  तुम्हारे  आज ! ...
उससे भी तुम पूछ लो , कितना दोगी ब्याज !! ...

दीवाली के रोज़ भी , आया नहीं सुहाग ! ...
अश्कों से ही रात भर ,जलते रहे चराग़ !! ....

विजेन्द्र शर्मा
सीमा सुरक्षा बल 
सीमान्त मुख्यालय ,सिलीगुड़ी

Latest poems