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बददुआ अब खाली नहीं जाती

मेरे दुश्मनो की बददुआ अब खाली नहीं जाती !!
कुछ भी कर लू मेरे दर से बदहाली नहीं जाती !!

लाख हंसने की कोशिश मैं भी करता हूँ लेकिन,
मेरे चेहरे से उदाशियों की रखवाली नहीं जाती !!

ये नादाँ दिल मत उम्मीदों की अम्बार तू बढ़ा,
दौरे नाकामी में ये बोझ संभाली नहीं जाती !!

कौन चाहता हैं दुनिया में रंजो-गम में रहना,
मगर कुछ मुसीबतें चाहकर भी टाली नहीं जाती !!

तोहमत औरों पे लगाना कहा तक हैं मुनासिब, 
ताउम्र अपनी ही जमीर खंगाली नहीं जाती !!

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वक्त कुछ यूँ बदल कि बदल गया जीने का ढंग,
हर चेहरे पर नकाब है और चढा है फरेब का रंग ,
झुँठ की पगड़ंडी पर सत्य फिसल फिसल जाता है,
और चकाचौंध रोशनी में भी नजर नहीं आता है!
खुद को देख सके पलभर ठहरकर कहीं,
वह मन का दर्पण भी तो पास नहीं
कुछ भी तो यहाँ खास नहीं,
फुल खिले खिले नजर भर आते है,
मगर इनमें भी सत्यता की सुहास नहीं,
कुछ भी तो यहाँ खास नहीं"!

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कहाँ ढूढते हो वजूद अपना आइने में, 
वो सच कहाँ जो इक से तुझको दो बनाये

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"मै इस असीम दुख से सींच कर संसार सारा, 
सांस की वर्दावली से गा रहा हूँ यश तुम्हारा 
पर तुम्हें अब कौन स्वर स्वरकार मेरे पास लाये, 
भुलकर भी तुम ना आयें 
आँख के आंसू उमड़कर आँख ही में है समाये "!

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