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poems> Inspirable

सब अंदर से समान है कोई

सब अंदर से समान है
कोई छोटा, तो कोई मोटा 
बईमान है

किसी के ईक तो किसी के दो-तीन 
परते चढ़ी है
कोई मन से तो कोई बोली का
खराब है

दिल में कांटे सब रखते है
कुछ खुद के तो कुछ दूसरों के
चुभते है।

मन में,
सच्चाई किसी के कम किसी के ज्यादा है
यही कमी बड़ी बाधा है

कोई रावण तो कोई राम हो जाता
कमजोर मन ही सारे काम करवाता 

मन को जीतना आसान नहीं 
मुश्क़िल हो ऐसा भी काम नहीं


द्वारा राघव पुरोहित

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