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poems > Mohabbat

Loktantra fir bhi zinda hai

ऐसा नहीं कि हमको मुहब्बत नहीं मिली, 
तुझे चाहते थे, पर तेरी उल्फत नही मिली,
मिलने को तो ज़िंदगी में कईं हमसफ़र मिले, 
पर उनकी तबियत से अपनी तबियत नही मिली,
चेहरों में दूसरों के तुझे ढूंढते रहे दर-ब-दर, 
सूरत नही मिली, तो कहीं सीरत नही मिली,
बहुत देर से आया था वो मेरे पास यारों, 
अल्फाज ढूंढने की भी मोहलत नही मिली,
तुझे गिला था कि तवज्जो न मिली तुझे,
मगर हमको तो खुद अपनी मुहब्बत नही मिली,
हमे तो तेरी हर आदत अच्छी लगी "राज"
पर अफ़सोस .... 
तेरी आदत से मेरी आदत नही मिली..

- राजकुमार दायमा 7597740233

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