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poems > Nav Samvatsar (Vikram Sanvatsar)

नव वर्ष की प्रथम भोर, नव

नव वर्ष की प्रथम भोर,
नव वर्ष कि प्रथम भोर!
करती है अंतरमन विभोर 
हो जीवन में उत्कर्ष
स्वागत है नव वर्ष धरा पर
स्वागत है नव वर्ष।
प्रथम रश्मियाँ अपने संग
लाएँ आशा और उमंग
भरें जीवन में हर हर्ष
स्वागत है नव वर्ष धरा पर
स्वागत है नव वर्ष।
फैले मानवता का धर्म
शिखर छू लें सब सत्कर्म
यही हो जीवन का निष्कर्ष
स्वागत है नव वर्ष धरा पर
स्वागत है नव वर्ष।


गत हिन्दू वर्ष की अन्तिम अमावस्या की अंधेरी रात व्यतीत हो चुकी है। आज चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के ऊषाकाल में अरुणोदय के साथ ही विक्रम संवत 2070 का आगमन हो चुका है। 

नए वर्ष के, नए दिवस के,
नए सूर्य तुम्हारी हो जय-जय
तुम-सा हो सौभाग्य सभी का,
नया क्षितिज हो मंगलमय।
नव वर्ष एवं नवरात्र के प्रारंभ के इस बेला में
आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभ कामनाए.............

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