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आज हम ब्रिटिश पंचांग या

आज हम ब्रिटिश पंचांग या ग्रेगोरियन कलेंडर को व्यवहार में लाते हैं, जो शुद्ध नहीं है। इतिहास में 2 सितंबर 1752 का दिन महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन ब्रिटिश संसद में पंचांग सुधार अध्यादेश पारित हुआ था, जिसमें कहा गया था कि सितंबर 2, 1752 के बाद आने वाला दिन सितंबर 14 होगा। 11 दिनों को गायब कर दिया गया, क्योंकि ईसाइयों को गणना में समस्या होने लगी थी। कारण कुछ भी हो, किंतु क्या यह खगोल प्रकृति के विरूद्ध नहीं है, फिर भी इसी कलेंडर को दुनिया ज्यादा व्यवहार में लाती है। इस कलेंडर को चलाए रखने के लिए दुनिया भर की घडियों तक को कुछ पल के लिए रोक देना पड़ता है। दूसरी ओर, विक्रम संवत में ऎसा परिवर्तन न कभी हुआ है और न कभी आवश्यकता पड़ेगी, क्योंकि यह भारतीय धार्मिक-सांस्कृतिक पंचांग या कलेंडर पूर्ण रूप से खगोल विज्ञान पर आधारित है

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