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| Facts >> Rajasthan बहादुर शाह ने सवाई जयसिंह से नाराज होकर आमेर का नाम मोमिनबाद रख दिया था सवाई जयसिंह के समय 17जुलाई, 1734 को हुरडा सम्मेदलन आयोजित किया गया सवाई जयसिंह बिशन सिंह के पुत्र थे सवाई जयसिंह का मूल नाम विजय सिंह था जिसे सवाई जयसिंह नाम औरंगजेब ने दिया था मिर्जा राजा जयंसिंह ने शिवाजी को औरंगजेब के दरबार में आने के लिए रजामंद किया तथा शिवाजी के साथ 11 जून, 1665 को पुरन्दर संधि की थी मिर्जा राजा जयंसिह ने तीन मुगल बादशाह जहांगीर, शाहजहाँ तथा औरंगजेब के साथ कार्य किया था मानसिंह तथा महाराणा प्रताप के बीच हल्दीघाटी का प्रसिद्ध युद्ध हुआ जिसमें मानसिंह की जीत हुई थी अकबर ने महाराणा प्रताप कोसमझाने के लिए भगवन्त दास तथ मानसिंह कोअपना राजदूत बनाकर भेजा था भारमल के पुत्र भगवन्त दास ने अपनी पुत्री मानबाई का विवाह शहजादे सलीम से किया था भारतमल ने 1547 ई. को आमेर की गद्दी पर अधिकार किया तथा अपनी पुत्री हरखा बाई का विवाह मुगल बादशाह अकबर से किया दुलहराय के पुत्र काकिल देव ने 1207 म आमेर की मीणाओं से छुडाकर उसे अपनी राजधानी बनाया तभी से वह कछवाह राजपूतों की राजधानी रही है ढढाड की स्थापना 1137 के लगभग दुलहराय ने की थी कछवाह स्वयंको भगवान राम के पुत्र कुश का वंशज मानते है महाराजा रायसिंह को राजपूताना का कर्ण कहा जाता है महाराजा अनूप सिंह को जांगलधर बादशाह कहा जाता है बीकानेर के राठोडपंश का संस्थापक राव जोधा का पु राव बीका था। उसने जांगलन प्रदेश को जीत कर बीकानेर के राठोड राजवंश की नींव डाली थी महाराजा जसवंत सिंह की मृत्यु के बाद उसकी गर्भवतीरानी ने अजीत सिंह को जन्म दिया सिंह वीर दुर्गादास ने औरंगजेब के चुंगल से छुडाकर जोधपुर का शासक बनाया था महाराजा जसवंत सिंह ने शाहजहां के चारों पुत्रों में हुए उत्तराधिकार युद्ध म दाराशिकोह का साथ दिया राव चन्द्रसेन के बडे भाई मोटा राजा उदयसिंह ने अकबर की अधीनता स्वीकार की तथा अपनी पुत्री जगत गुसाई का विवाह अकबर से किया राव चन्द्र सेन को मारवाड का प्रताप कहा जाता है मालदेव तथा शेरशाह सूरी के बीच 1543 ई. में गिरि सुमेल युद्ध हुआ जिसमें शेरशाह सूरी हारते-हारते जीता तथा उसने जीतने बाद उसने कहा था कि ’मै मुट्ठी भर बाजरा के लिए सारे हिन्दुस्तान की बादशाहत खो देता‘। युद्ध में मालदेव के सरदार जैता एवं कूपा मारे गए। राव मालदेव ( 1531-1562 ) राव गंगा का पुत्र था राव जोधा ने 1459 ई. में चिडया टूंक पहाडी पर जोधपुर दुर्ग ( मेहरान गढ ) का निर्माण कराया था। मारवाड के राठोड वंश के संस्थापक राव सीहा थे कर्नल जेम्स टॉड ने हल्दीघाटी युद्ध को मेवाड का थर्मोपॉली तथा दिवेर युद्ध को मेवाड का मेराथन कहा है । महाराणा प्रताप ने चावण्ड को अपनी दूसरी राजधनी बनाया तथा यहीं 19 जनवरी, 1597 को उनका देहान्त हुआ। चावण्ड में ही उनकी समाधि स्थित है महाराणा प्रताप तथा मुगल सेना के सेनापति मानसिंह के बीच 21 जून, 1576 को हल्दीघाटी का प्रसिद्ध युद्ध हुआ जिसके बाद महाराणा प्रताप जंगलों मे चले गए। महाराणा सांगा ने तथा बाबर के बीच 17 मार्च, 1527 को खानवा का युद्ध हुआ जिसमें राणा सांगा की पराजय हुई । महाराणा कुम्भा के खिलाफ मालवा के महमूद खिलजी, गुजरात के कुतुबद्दीन ने चंपानेर की संधिक की थी। कुम्भा काउसके पुत्र उदा ने हत्या कर दी थी मण्डन राणा कुंभा का प्रमख वास्तुकार एवं शिल्पी था |
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