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धूड़! दो आखरां रो नांव,

धूड़! दो आखरां रो नांव, पर इणरी क्रिया-प्रतिक्रिया में कई-कई अरथ निकळै:
धूड़ खावणी: गलती या गलत काम कर बैठना
धूड़ उडावणी: काम बिगाड़ देना, बदनामी लेना
धूड़ न्हाखणी: किसी की भर्त्सना करना
धूड़ रळावणी: कार्य में विघ्न डालना, मजा किरकिरा कर देना।
धूड़ देवणी: माफ कर देना या सुपुर्दे खाक करना।

धूड़ खायां किसो काळ निकळै? (मिट्टी खाने से अकाल नहीं निकल जाता, पेट नहीं भरता।
धूड़ खावणी जद ओछ क्यूं रळावणी (निकृष्ट काम करने पर उतारू हो गए तो फिर कसर क्यूं रखते हो?
धूड़ धाणी राख छाणी (सब कुछ बर्बाद करने वाले के लिए कहावत या जो सामर्थ्य विहीन हो।)
धूड़ रा दो दाणा ई कोनी (मिट्टी के दो दानें ही नहीं है। जो किसी काम के लायक न हो।)

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