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खिड़किया खुली रखा करो भाई

बार बार उसे समझाया है
खिड़किया खुली रखा करो भाई
ताजा हवा धूप को पसरने दो
सीलन भरी कोठड़ी को
पक्षियों के कलरव से भर जाने दो
जिसमें तुम
अंगरखा पहने
पितामह की तरह
गीता पर केसर के 
छीटे उड़ेलते
हाथ बाँधे छत ताकते हो
उसने रोशनी के सारे रास्ते 
बंद कर दिए।
मैने उसे
एक किताब दी
उसने उस पर चंदन छिड़क दिया
मैने उसे 
एक चिराग दिया
काले शीशे के पिजरे मे
उसे कैद कर दिया
रोशनी से उसे सख्त नफरत है आजकल
सर्दी से बचने का साधन आग 
और 
अंधेरे से लड़ने का हथियार 
रोशनी है।
मै उसे रोज समझाता हूँ
वह शून्य मे ताकता रहता है।
आप भी उसे समझाइये
इस कैद से बाहर तो 
आना ही होगा
व्यथ॔ ही भयभीत है मेरा यार
बाहर उसी का लड़का
और मेरी लड़की
छेनी से दीवार तोड़ने मे तल्लीन है
जाने क्योंकि मेरा भाई गमगीन है
बार बार उसे समझाता हू 
खिडकिया खुली रखा करो।

--- सरल विशारद

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