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‘अ’ से अनार ‘आ’ से आम वर्णमाला

‘अ’ से अनार
‘आ’ से आम
वर्णमाला के एक-एक अक्षर
उसी तरह हमारी टीचर ने हमारे मुँह में डाले
जिस तरह माँ ने रोटी के निवाले
माँ आँचल में छिपाए रखना चाहती थी
टीचर दुनिया से मुक़ाबला करवाती थी
माँ कभी परीक्षा नहीं लेती
ताकि हम हार न जाएँ
टीचर बार-बार परीक्षाएँ लेती
ताकि हम जीत के क़ाबिल बन पाएँ
माँ कहती उधर न चढ़ना, गिर जाओगे
टीचर कहती बेशक़ गिरो; पर बार-बार चढ़ना
एक दिन सम्भल जाओगे
इस तरह जीवन की हर राह में
हम जीत हासिल कर सके
मुश्क़िलों से लड़ सके
यह सिखाने वाले होते हैं हमारे टीचर
जो कभी भुलाए नहीं जाते हैं
और सीखने-सिखाने की बात हो
तो उम्र भर याद आते हैं

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