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poems > Reminder

देखिये वो काली काली बदलियाँ ज़ुल्फ़

देखिये वो काली काली बदलियाँ
ज़ुल्फ़ की घटा चुरा न ले कहीं
चोरी चोरी आके शोख बिजलियाँ
आपकी अदा चुरा न ले कहीं
यूँ क़दम अकेले न आगे बढ़ाइये
आपको हमारी...कसम लौट आइये

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