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देवत्व और आदर्शो का परिधान

देवत्व और आदर्शो का परिधान ओढ़
मैंने क्या पाया..... ? 
निर्वासन ! 
प्रेयसी - वियोग !!
हर परम्परा के मरने का विष 
मुझे मिला,
हर सूत्रपात्र का श्रेय 
ले गए और लोग !

... मैं उब चूका हूँ इस महिमा मंडित छल से...!

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