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क्रन्तिकारी बहुत ही क्रन्तिकारी

व्हाट्स अप अपने क्रांतिकारी दौर से गुजर रहा है, हर आदमी क्रांति करना चाहता है।
कोई बेडरूम में लेटे लेटे गौ हत्या करने वालों को सबक सिखाने कि बातें कर रहा है तो किसी के इरादे सोफे पर बैठे बैठे मुसलमानो या हिंदूओं को उखाड फेंकने के हो रहे हैं। 
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गांव जाने के नाम पर आत्महत्या कि धमकी देने वाले ढक्कन किसानों को ज्ञान पेल रहे हैं। तो कुछ हफ्ते में एक दिन नहाने वाले स्वच्छता अभियान कि खिलाफत और समर्थन कर रहे हैं। 
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अपने बिस्तर से उठकर एक ग्लास पानी लेने पर नौबेल पुरस्कार कि उम्मीद रखने वाले बता रहे हैं कि मां बाप की सेवा कैसे करनी चाहीये। जिन्होंने आज तक बचपन में कंचे तक नहीं जीते वह बता रहे हैं कि भारत रत्न किसे मिलना चाहीये। 
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जिन्हें गल्ली क्रिकेट में इसी शर्त पर खिलाया जाता था कि बॉल कोई भी मारे पर अगर नाली में गयी तो निकालना तुझे ही पडेगा वह आज कोहली को समझाते पाये जायेंगे की उसे कैसे खेलना है। 
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जो महाशय लडकों को भी बुरी नजर से देखते हैं आज उन्हें नारी सुरक्षा कि चिंता है। देश में महिलाओं की कम जनसंख्या को देखते हुये उन्होनें नकली ID's बना कर जनसंख्या को बराबर कर दिया है। 

जिन्हें यह तक नही पता कि हुमायूं बाबर का क्या था वह आज बता रहे हैं कि किसने कितनों को काटा था। हाथ में चश्मा पकडकर भी पुरे घर में चश्मा ढूंढने वाले अंधे बतायेंगे कि कौन सा नेता कौन सा वादा भुल गया। 
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जिन्हें यह तक नही याद है कि हमारे राज्य की राजधानी क्या है वह भी बता रहे होते हैं कि सनातन धर्म में पाच हजार साल पहले क्या हुआ था। कुछ धर्म के ठेकेदार भी हैं जो दिन भर हिंदू मुसलमान होने के सर्टीफिकेट बाटते रहते हैं जैसे कि जब तक उनकी फोटो लाईक नही करेंगे आपको आपके मोहल्ले के लोग हिंदू या मुसलमान ही नही मानेंगे।
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कुछ दिन भर शायरीयाँ पेलेंगे जैसे 'गा़लिब' के असली बाप यही थे। कोई अपनी शायरी में गम दिखा रहा है तो कोई बता रहा है कि वह कितने बड़े तोप है। जो लोग एक चिंटी काट लेने पर रो रो कर पुरे मोहल्ले में हल्ला मचा देते हैं वह प्यार में और देश के लिये सर कटा लेने कि बात करते दिखेंगे।
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किसी भी पार्टी का समर्थक होने में समस्या यह है कि भाजपा समर्थक को अंधभक्त, आप समर्थक तथा काँग्रेस समर्थक बेरोजगार करार दे दिये जाते हैं। 
कॉपी पेस्ट करनेवालों के तो कहने ही क्या किसी की भी पोस्ट चेंप कर एेसे व्यवहार करेंगे जैसे साहित्य की गंगा उसके घर से ही बहती है। 
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लेकिन समाज के असली जिम्मेदार नागरिक हैं टैगिये, इन्हें एैसा लगता है कि जब तक यह गुड मॉर्निंग वाले पोस्ट पर टैग नहीं करेंगे तब तक लोगों को पता ही नही चलेगा कि रात हो चुकी है। गुड नाईट वाला टैग देखे बिना नींद ही नहीं आयेंगी। मना करने के बाबजूद टैग करने वाले यह वही गुस्ताख हैं जिनकी वजह से शादीयों में गुलाबजामुन वाले स्टॉल पर एक आदमी खडा रखना जरूरी है।  uniqueidea.net
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कॉकरोच देखकर चिल्लाते हुये दस किलोमीटर तक भागने वाले लोगो को धमका रहे होंगे कि "अब भी वक्त है सुधर जाओ"।
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🃏क्रन्तिकारी बहुत ही क्रन्तिकारी।।🃏🏻 rajb2b.com

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