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poems > Winter

Sard Hawaon Ka Daur

बे शक हो सर्द हवाओं का दौर, 
सुखे तिनकों की है आंच कहां कमजोर । 
बंद कमरे से जरा बाहर तो आओ, 
सुर्योदय की लालिमा है छाई हर ओर ।

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