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poems> Dosti

बंद गांठो को खोल लिया करो

सबकी जिंदगी बदल गयी
एक नए सिरे में ढल गयी
कोई gilfriend में busy है
कोई बीवी के पीछे crazy हैं
किसी को नौकरी से फुरसत नही
किसी को दोस्तों की जरुरत नही
कोई पढने में डूबा है
किसी की दो दो महबूबा हैं
सारे यार गुम हो गये हैं
तू से आप और तुम हो गये है
कोई hello बोल कर formality करता हैं
कोई बात न करने के लिए guilty करता हैं
वक़्त वक़्त की बात हैं
किसी ने number save किया
किसी ने अजनबी सा behave किया
माना के अब हम साथ नही है
पर चुप चुप रहने की भी तो बात
नही हैं
कभी मिलो तो बोल लिया करो
बंद गांठो को खोल लिया करो
शिकायत हो तो दूर करो
पर यारो को खुद से न दूर करो...10:09 AM

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