किसी ने सही ही कहा है कि
प्रभु की माया को कोई नही जान पाया,
अरे मैं तो कहता हूं कि राम की,
श्याम की, मोहन की माया को भी कोई
नही जान पाया, क्योंकि माया
नाम की औरतें बहुत चालू होती है
हम भी पडे थे एक बार
माया के चक्कर में, कहीं
और नही बल्कि हमारे ही
दफ्तर में लेकिन उसने हमको
घास भी नही डाली क्योंकि
वो निकली एक शादीशुदा नारी
मिलेगी खुब माया यह सोचकर
हमने एक धनी लडकी से ब्याह रचाया
मगर शादी के पहले दिन ही उसने
अपना असली रूप दिखाया और मुझे
सुबह शाम पैर दबाने की ड्यूटी पर लगाया।
प्रभु तेरी माया, हमको समझ ना आए,
एक ढूंढों दस मिलते है, कितने पागल बनाऐं
२० फुट ऊंचे बांस पर, बीरबल खिचडी पकाएं
सारी जीवन की दौलत शाहजहां,
एक ताज पर लगाए,
गुंगा चीखें, लूला दौडे, अंधा पिक्चर जाएं,
गंजे के सिर पर जूं पडे, खुजा खुजा मर जाए
धार्मिक सम्मेलन में संतों ने की
गुहार,
माया के फेर में न पडे, यह है दुधारी तलवार
पीछे से आवाज आई, पहले माया तो दिलवाओ
फिर उससे बचने के तरीके समझाओं